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सोमवार

हिंदी का अंत कमिंग सून

छठी कक्षा में अंग्रेजी पढ़ी थी , आज पढाई से पहले इंग्लिश आ गई |आज ये हाल है कि बड़े शहरो में हमें हिंदी बोलने में शर्म आती है | शहर में आपने आप को ज्यादा पढ़ा व गुणवान दिखाने के लिए इंग्लिश बोलना जरूरी हो गया है| ठीक है समय के साथ बदलना जरूरी है पर शायद इतना भी जरूरी नहीं है कि न आते हुए भी बोलना ही है|
  भारत देश का नाम इंडिया हो गया | शायद ही कोई कहता हो कि भारत का रहने वाला हूँ | चलो जैसे भी हो देखते है इंडिया से हिंदी कितने दिन में समाप्त होने वाली है |
ये एक उदाहरण है जिसमे मेरे जैसे वी॰ आई॰ पी॰   को अपनी इज्जत के चक्कर में इंलिश बोलनी पड़ी |

रविवार

सोनागाछी

बंगाल ही नहीं

भारत भर के कारीगरों ने

इस बार नहीं गढ़ीं

मिट्टी से मूर्तियां

सोनागाछी ही नहीं भारत भर की

उन बस्तियों से निकालकर

बाहर लाए वे वेश्याओं को

उन्होंने रखा इस बात का ़ख्याल

उनमें से कोई बूढ़ी-पुरानी

दर्द से कराहती, खांसती-मरती

नहीं छूटे उस अंधेरे में भीतर के

कारीगरों ने इस बार उन सबका

किया ठीक वैसा ही श्रंगार जैसा

करते आए वे मूर्तियों का अब तक

और उन्हें बिठाया जगमगाते

उन मंडपों में ले जाकर, आख़िर

उन्हें हमने ही तो गढ़ा अब तक

लगातार हमारा होना झेलती

कोई देवी नहीं थी इससे पहले

हमारे पास, इस बार उन्होंने

गढ़ी दसवी देवी जिसका

नाम पड़ा देवी सोनागाछी