बड़े निराले बादल
काले-काले बादल.
सूरज तो शरमीला
बरखा पाले बादल.
बरसात में बूंद के
सिक्के ढाले बादल.
बच्चों को नहलाने
पानी डाले बादल.
ककड़ी-भूट्टे लाएं
पानी वाले बादल.
स्कूल में लगवाते
अक्सर ताले बादल.
कहने को काले हैं
देते उजाले बादल.
डॉ रफीक नागौरी - उज्जैन, मध्यप्रदेश|
भक्ति, शक्ति और हिंदुत्व के साथ जो जिंदगी की यात्रा मैने जी है और जिस प्रकार जीने का अनुमान है, उस भूत और भविष्य को लेखनी के माध्यम से संवादित करने की चेष्ठा करूंगा। सामान्यता हर जीव की यात्रा में सुख दुःख धूप छांव की तरह आते रहते हैं, परंतु इस यात्रा की इस धूप छांव को अपने सहयात्रियों से साझा करने पर इसे मज़ेदार और प्रसन्नचित बनाया जा सकता है। इसलिए आइए, मैं अपने विचार रखता हूं, आप अपने विचार व्यक्त कीजिए।
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